क्या करें एवं क्या न करें (DO’s & DON’TS)


सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का मूल्यांकन अब व्यावसायिक संस्थाओं के रूप में भी किया जा रहा है, जिनसे निवेश पर अधिकतम प्रतिफल प्राप्त करने की अपेक्षा की जाती है। इन उपक्रमों के प्रबंधन से अपेक्षा की जाती है कि वे निजी कंपनियों एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए, सभी संभावित जोखिमों के साथ गतिशील वातावरण में व्यावसायिक निर्णय लें।

तथापि, केवल प्रतिस्पर्धा या लाभ अर्जन के नाम पर सरकार के नियमों एवं विनियमों, तथा समय-समय पर सतर्कता आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

क्या करें (DO’s)

  • शासकीय कार्यों को अपने निजी कार्यों के समान मानते हुए, उसी सावधानी एवं विवेक के साथ उनका निष्पादन करें।
  • एक लोक सेवक, एक अच्छे नागरिक एवं एक सतर्क पेशेवर के रूप में समय-समय पर आत्म-मूल्यांकन करें, तथा यह भी समझने का प्रयास करें कि अन्य लोग आपके बारे में क्या सोचते और कहते हैं।
  • पूर्ण ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखें।
  • अपने विचारों एवं निर्णयों में सदैव दृढ़ एवं संकल्पित रहें।
  • जब तक विपरीत सिद्ध न हो, प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदार एवं सदाशयी मानें।
  • यह सदैव स्मरण रखें कि भ्रष्टाचार छोटे स्तर से आरंभ होता है; अतः बुराई को प्रारंभ में ही समाप्त करना विवेकपूर्ण है।
  • भ्रष्टाचार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध त्वरित एवं दृढ़ कार्रवाई करें। इससे संगठन का नैतिक स्वास्थ्य सुदृढ़ होगा, ईमानदार कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा भ्रष्ट तत्वों पर निरंतर दबाव बना रहेगा।
  • कानून का सम्मान करें, कानून की रक्षा करें तथा कानून का पालन करें — यह आवश्यकता पड़ने पर आपकी भी रक्षा करता है।
  • “कानून की अज्ञानता कोई बहाना नहीं है” — यह कहावत सतर्कता के क्षेत्र में भी पूर्णतः लागू होती है। सतर्कता से संबंधित नियमों एवं विनियमों का ज्ञान सुदृढ़ करें, इससे आप सुरक्षित रहेंगे।
क्या न करें (DON’TS)

  • किसी कर्मचारी के विरुद्ध अनावश्यक रूप से मामला बनाने में कभी भी सहभागी न बनें।
  • स्थानीय दबाव, व्यक्तिगत संबंध, परिचय या अन्य किसी बाहरी प्रभाव में आकर सतर्कता का मामला दर्ज न करें।
  • जल्दबाज़ी या त्रुटिपूर्ण निष्कर्षों पर न पहुँचें।
  • पूर्वाग्रह, दबाव, अनुमान या अटकलों से प्रभावित न हों।
  • किसी भी प्रकार के अनुचित लाभ की मांग न करें।
  • यदि कोई सुविधा प्रदान की जाए जो आपके अधिकार में नहीं है, तो उसे स्वीकार न करें।
  • सार्वजनिक धन के एक रुपये को भी अपने सौ रुपये के समान महत्व दें।
  • ऐसा कोई कार्य न करें जो नैतिक रूप से अनुचित अथवा कानून के विरुद्ध हो।
  • किसी कार्य को कराने हेतु कभी भी “पिछला दरवाज़ा” (Backdoor) तरीका न अपनाएँ। यह स्थायी नहीं होता और आपको कठिनाई में डाल सकता है।
  • शब्द, विचार एवं कर्म — तीनों में सभी शासकीय मामलों में निरंतरता के सिद्धांत का उल्लंघन न करें, तथा सदैव वही करें जो उचित एवं सही हो।